Tuesday, July 13, 2010

मैं तो हंसना चाहता हूं

मैं तो हंसना चाहता हूं
आप मेरी मदद कीजिए
मुझे हर सबब मुहैया करवाइए
मेरी $जरूरतें समझिए
दाल-भात के सिवाय भी
मुझे बहुत कुछ चाहिए
जानने के लिए
समझाने के लिए
देने के लिए
अरे, मैं तो हंसना चाहता हूं
आप मेरी मदद क ीजिए ।

मुझे रिक्शा चालक के पसीने का अर्थतन्त्र समझना है
पतिहीना के चरित्र-तंत्र का गणित
हल करना है,
यह जो बबुआ
चाय की दुकान पर काम करता है
जूठे बरतन उठाता है-मांजता है
फिर भी चोरी करता है-
उसके हृदय का खुलासा करना है
आप मेरी मदद कीजिए।
मैं तो हंसना चाहता हूँ

मुझसे हाथ मिलाइए
और पक्की बात कीजिए
आप मेरी मदद करेंगे ।
सच जानें,
बच्चा जनती औरत
अगर मरती है
तो मुझे
अ$फसोस नहीं-$गुस्सा आता है,
भवन-निर्माण के व$क्त
म$जदूर का गिरना और दम तोडऩा
मुझमें सहानुभूति नहीं
ग्लानि भरता है
बेटा, पिता को गाली देता है

तो मुझे
आश्चर्य कम
अश्लील ज्य़ादा लगता है।

अरे.... यह जो कल सायं
पड़ोस में बहू पिटी-
पति से, सास-ससुर से, ननद से
तो मुझे दु:ख से कहीं ज्य़ादा
हीनभावना से प्रताडि़त होना पड़ा था
कि मैं कुछ करता क्यों नहीं!
कितना दु:खान्त है
कि मैं तो हंसना चाहता हूं
पर उदास हो जाता हंू
और उदासी
मुझे हैरान करती है
परेशान करती है
तब मेरे लिए
जीवन की परिभाषा ही बदल जाती है।
मोहन सपरा
संकलन ''काले पृष्ठों पर उकरे शब्द'' में से

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